Friday, July 1, 2011

हाथी और लोमड़ी

                        किसी जंगल में एक हाथी रहता था| हाथी बहुत बड़ा और ताकतवर था| कोई भी जंगली जानवर उस हाथी के नजदीक नहीं फटकता था| सब जानवर उस से डरते थे| वैसे हाथी किसी जानवर को कुछ भी नहीं कहता था| अकेला ही जंगल में घूमता रहता था| अपनी लम्बी सूंड से ऊँचे ऊँचे पेड़ों की टहनियों को तोड़ कर खाया करता था और जंगल के बीच वाले तालाब से पानी पीकर वहीँ पड़ा रहता था| इसी जंगल में एक लोमड़ियों का झुण्ड भी रहता था| लोमड़ियों का झुण्ड भी हाथी को देख कर परेशान रहता था| खुलकर शिकार नहीं कर सकता था| एक बार लोमड़ियों ने एक सभा बुलाई जिसमें उन्हों ने हाथी को ठिकाने लगाने की सोची| उन्हों ने सोचा की अगर हाथी को मारगिराया  तो काफी दिनों के लिए खाना भी हो जाएगा  और हाथी से छुटकारा भी मिल जाएगा| पर किसी में भी इतनी हिम्मत नहीं थी कि हाथी का मुकाबला कर सके| आखिर में एक लोमड़ी ने कहा हाथी को तो में मार सकती हूँ| अगर सभी मेरा साथ दें तो| सभी ने हामी भरदी| लोमड़ी ने कहा तुम देखते जाओ  में हाथी से कैसे निबटती हूँ|                                                                                                                                

                       अगले दिन लोमड़ी सुबह सुबह हाथी के घर चली गयी और हाथी को प्रणाम किया| हाथी ने लोमड़ी से पूछा तुम कौन हो कहाँ से आई हो, तुम्हें पहले कभी देखा नहीं है| लोमड़ी ने कहा हमारे जंगल में कोई भी राजा नहीं है| आप बहुत बड़े भी हैं और ताकतवर भी हैं, इसलिए सभी जंगल के जानवरों ने फैसला किया है कि आपको ही जंगल का राजा बनाया जाय| राजा बनाने की  बात सुनकर हाथी बहुत खुश हो गया| हाथी को खुश हुआ देखकर लोमड़ी ने कहा राजा बनाने का महूर्त कल सुबह का ही निकला है इस लिए हमें आज ही वहां जाना होगा ताकि सुबह समय पर राज्याभिषेक किया जा सके| इतना सुनते ही हाथी चलने को तयार हो गया| आगे आगे लोमड़ी चलने लगी और पीछे पीछे हाथी चलने लगा| लोमड़ी हाथी को एक ऐसे रास्ते से ले गयी जहाँ दलदल से हो कर जाना पड़ता था| लोमड़ी हलकी होने से दलदल के ऊपर से आराम से निकल गयी लेकिन हाथी ज्यों ही दलदल के ऊपर से जाने लगा उसके पैर दलदल में धंस गए| हाथी ने लोमड़ी को आवाज देकर रुकने को कहा लोमड़ी ने मुड़ कर देखा तो हाथी दलदल में फसा हुआ था और जितनी कोशिश बाहर निकलने की  करता था उतना ही दलदल में फसता जा रहा था| लोमड़ी ने देखा कि उसकी चाल काम कर गयी है| लोमड़ी ख़ुशी ख़ुशी  अपने साथियों को बुलाने को चली गई| वापस आने पर देखा कि हाथी दलदल में दब चुका है यह देख कर लोमड़ी का दल बहुत खुश हुआ और हाथी को खाने के लिए टूट पड़ा| इस तरह हाथी ने बहकावे में आकर अपनी जान  गवा दी| इस लिए कहते हैं कि बिना सोचे समझे किसी के बहकावे में नहीं आना चाहिए|     

15 comments:

  1. lalach buri bala hai aur mil kar ghat ye dono jahan ho ahan to vinash hona hi hai.sarthak prerna prad kahani.

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  2. aapke dono blog ki kahaniya padhati rahi hu bahut hi shikshaprad hoti hai ...mai chahati hu kaiyo ke podcast banana ....aapka mail id nahi mila hai ..aapako podcast sunwana hai ...

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  3. सुनिए सब की पर करिए अपने मन की

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  4. लोमड़ी के बनाने से राजा नहीं बनना चाहिये।

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  5. सच में बिना समझे कुछ नहीं स्वीकार करना चाहिए !

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  6. सही बात बताती कहानी...

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  7. इसीलिए कहा गया है...मीठी-मीठी बातों से बचना ज़रा...दुनिया के लोगों में है जादू भरा...छल से किसी बहादुर को भी शिकार बनाया जा सकता है...यदि कोई अनायास मीठी बातें करे तो ज़रूर चौकन्ने हो जाना चाहिए...

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  8. किसी के बहकावे में नहीं आना चाहिए. एकदम सही बात है .

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  9. सही बात बताती कहानी... किसी के बहकावे में नहीं आना चाहिए एकदम सही बात है .

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  10. सही बात बताती और अच्छी सीख देती सुन्दर सी कहानी...

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  11. हमेशा की तरह अच्छी कहानी!बहुत बहुत आभार,

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  12. बहुत सुन्दर शिक्षाप्रद कथा...

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  13. Kahani toh acchi thi par lomrio ne hathi ko khaya kaise? Daldal mein doob kar?

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