Wednesday, May 11, 2011

चालाक बिल्ली

                             बहुत समय पहले की बात है| एक जंगल में एक बहुत बड़ा पेड़ था| इस पेड़ की शाखाओं पर  बहुत सारे पक्षी रहा करते थे| इस पेड़ की एक शाखा पर एक चिड़िया और एक कौवा भी रहते थे|  दोनों ने अपने अपने घोंसले बना रक्खे थे| एक दिन चिड़िया ने कौवे से कहा "नजदीक में ही बहुत सारी फसल पक कर तयार हुई है में उसकी दवात उड़ाने जा रही हूँ तुम मेरे घर का ख्याल रखना"| कौवे ने कहा ठीक है| चिड़िया फुर्र से उड़ गई| शाम को कौवा चिड़िया का इंतजार करता रहा  पर चिड़िया नहीं आई| धीरे धीरे कई दिन बीतने पर कौवे ने सोचा कि हो सकता है, चिड़िया को किसी ने पकड़ लिया हो| कौवे को अब उमीद नहीं थी कि चिड़िया वापस आ जाएगी| एक दिन एक सफ़ेद रंग का खरगोश  वहां से जा रहा था तो उसकी नज़र उस खाली पड़े घोंसले पर पड़ी| अन्दर जा कर देखा वहां कोई नहीं था| खरगोश  को यह घर पसंद आगया और वह उसी घर में रहने लगा| कौवे ने भी कोई एतराज  नहीं किया|      
                          बहुत दिन बीतने पर जब फसल ख़तम हो गई तो चिड़िया वापस अपने घोंसले में आई| यहाँ आकर उसने देखा कि उसके घर में एक सफ़ेद रंग का खरगोश रह रहा है| उसने खरगोश से कहा कि यह घर तो मेरा है| खरगोश ने कहा में यहाँ कई दिनों से रह रहा हूँ इस लिए यह घर मेरा है| चिड़िया जब तक उड़ने वाली नहीं होती तबतक ही घोंसले में रहती है| चिड़िया नहीं मानी| खरगोश भी नहीं माना| दोनों खूब जोर जोर से बोल रहे थे| आखीर  में खरगोश ने कहा हमें किसी बुद्धिमान के पास जाकर अपना फैसला करवाना चाहिए| जिस के हक़ में फैसला होगा वह इसमें रहेगा , दूसरे को जाना  पड़ेगा| इस बात को चिड़िया भी मान गई| इन की इस  लड़ाई को एक बिल्ली ने भी सुन लिया था| बिल्ली फटा फट एक माला हाथ में लेकर जोर जोर से राम राम रटने लग गई| जैसे ही खरगोश की नज़र उस पर पड़ी तो खरगोश ने कहा वह देखो वह बिल्ली राम राम रट रहीं है उसी से फैसला करवा लेते है| चिड़िया ने कहा यह  हमारी पुरानी दुश्मन है इस लिए इस से दूरी बना कर ही बात करनी होगी| चिड़िया ने दूर से ही आवाज देकर कहा "महाराज हमारा एक फैसला करना है|" बिल्ली ने आँख खोलते कान पर हाथ रख कर कहा "क्या कहा जरा नजदीक आकर जोर से बोलो| चिड़िया ने जोर से कहा हमारा एक फैसला करना है जिस की जीत होगी उसको छोड़ दूसरे को तुम खा लेना| बिल्ली ने कहा "छि:, छि: तुम यह कैसी बातें कर रही हो| मेंने तो शिकार करना कब का छोड़ दिया है| तुम निडर हो कर नजदीक आकर मुझे सब बताओ में फैसला कर दूंगी | खरगोश को उसकी बात पर भरोसा हो गया| वह बिल्ली के नजदीक गया तो बिल्ली बोली "और नजदीक आओ मेरे कान में सारी  बात बताओ| खरगोश ने उसके कान में सभी कहानी बतादी| चिड़िया भी यह देख कर बिल्ली के पास पहुँच गई| मौका देखते ही बिल्ली ने झपटा मार कर दोनों को मार दिया और खा  गई| पेट भर जाने के बाद बिल्ली खुद घोंसले में गई और सोगई|  इसलिए कभी भी अपने दुश्मन पर विश्वास नहीं करना चाहिए|  

15 comments:

  1. ji sahi kaha aapne .dushman pr kya kisipr vishvash karna chahiye pr andhvishvash nahi .
    rachana

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  2. बहुत सुन्दर कथा..

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  3. जब बिना दिमाग का गधा हो सकता है...तो खरगोश या चिड़िया क्यों नहीं...

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  4. सच कहा आपने, विश्वास नहीं करना है।

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  5. ye to sach kaha ,aapki kahani kafi pasand aai .

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  6. मेरे कमेंट्स कहाँ खो गए

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  7. पतली डी विलेज जी बहुत सुन्दर कथा बच्चों के साथ हमारा भी मन रम गया
    इसलिए कभी भी अपने दुश्मन पर विश्वास नहीं करना चाहिए| सच कहा आप ने हम सब को सावधान रहना होगा

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  8. सच कहा सच में चालक

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  9. आपस में लड़ना और दुश्मन को दोस्त बनाना घातक होता है !

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  10. bahut bahut pasand aai aapki kahani.waqai apne dushman par kabhi bhi bharosha nahi karna chahiye.
    bahut hi sixhapradvasarthak kahani
    dhanyvaad
    poonam

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  11. अच्छी बोध कथा है भैया .

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  12. शिक्षाप्रद है कहानी

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