Friday, May 20, 2011

लोमड़ी और सारस

                       बहुत समय पहले की बात है एक जंगल में बहुत सारे पशु पक्षी रहा करते थे| सभी जानवर आपस में मिलजुल कर रहते थे| एक बार एक लोमड़ी जंगल में घूम रही थी| घूमते घूमते उसकी मुलाकात एक सारस से हो गई| धीरे धीरे दोनों की मुलाकात दोस्ती में बदल गई| दोनों पक्के दोस्त बन गए| एक दिन लोमड़ी ने सारस से कहा हमारी दोस्ती काफी दिनों से है पर हमने कभी भी एक दुसरे को दावत नहीं दी| कल को में तुम्हे दावत देना चाहता हूँ,  तुम मेरे घर दावत पर जरुर आना| सारस ने उसकी दावत का निमंत्रण सहर्ष स्वीकार कर लिया|
                      अगले दिन सारस सही समय पर लोमड़ी के घर दावत लेने पहुँच गया| लोमड़ी ने भी उसका स्वागत किया| खाने में लोमड़ी ने स्वादिष्ट खीर बनाई थी| जब खाने का समय हुआ तो लोमड़ी एक चौड़े बर्तन में खीर परोस कर ले आई| दोनों खाने लगे| सारस की चोंच इस में डूब नहीं रही थी इस लिए खीर का आनंद नहीं ले सका| लोमड़ी फटाफट सारी खीर चाट गई| सारस बिचारा भूखा ही रह गया| सारस लोमड़ी की चालाकी को समझ गया| सारस ने लोमड़ी को सबक सिखाने की सोची| फिर एक दिन सारस ने भी लोमड़ी को अपने घर दावत देने की सोची| उसने लोमड़ी को दावत का निमंत्रण दे दिया| लोमड़ी ने भी दावत को सहर्ष स्वीकार कर लिया| अगले दिन लोमड़ी बड़े चाव से सारस के घर दावत उड़ाने चली गई| सारस ने भी उसकी मनपसंद खीर बनाई थी| जब खाने का समय आया तो सारस एक पतले मुंह वाले बर्तन में खीर परोस कर ले आया और लोमड़ी को खाने का आग्रह किया| जब लोमड़ी खाने लगी तो उसकी जीभ खीर तक पहुंची ही नहीं| सारस ने अपनी लम्बी चौंच से सारी खीर डकार ली| लोमड़ी बेचारी को भूखे पेट ही रहना पड़ा और अपने किए पर काफी पछतावा भी हुआ| इसी लिए कहते है कि जो जैसा व्यवहार दूसरों के साथ करता है उसके साथ वैसा ही व्यवहार करना चाहिए|

23 comments:

  1. जैसा को तैसा मिला ...बहुत ही बढ़िया सिख

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  2. वाह जी, बहुत ही सुंदर कहानी है।

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  3. ये छोटी और प्रेरक कहानियां पढ़-पढ़ कर अपना बचपन बीता है...उन्हें पुनर्जीवित करने के लिए धन्यवाद...

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  4. एक सवाल है इस कहानी का मर्म क्या है की

    हमें दूसरो के साथ वैसा ही करना चाहिए जैसा की वो हमारे साथ करते है

    या हमारे साथ भी वैसा ही होता है जैसा की हम दूसरो के साथ करते है

    या हमें दूसरो के साथ वैसा व्यवहार नहीं करना चाहिए जैसा की हमें दूसरो के द्वारा अपने लिए किया जाना पसंद नहीं है |

    बात एक ही है किन्तु सभी में थोडा थोडा नैतिकता और शिक्षा का फर्क है |

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  5. सार्थक सीख देती बहुत सुन्दर कथा..

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  6. bahut achchi kahani.mere blog par apni precious tippani dene ke liye dhanyavaad.

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  7. अब कहानी के लिये कहीं नहीं जाना पडेगा,

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  8. बचपन में पढ़ी हुई कहानियाँ आज भी कितनी अच्छी लगती हैं ना...............

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  9. @अंशुमाला जी,
    आपकी बताई दोनों शिक्षायें तो हैं ही, मुझे इस कहानी से यह भी शिक्षा मिली कि मक्कारों का दिया अहसान भी फिज़ूल ही जाता है।

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  10. जो जैसा व्यवहार दूसरों के साथ करता है उसके साथ वैसा ही व्यवहार करना चाहिए|

    बहुत अच्छी कहानी पढ़ाने के लिए आपका धन्यवाद

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  11. बहुत ही सुंदर कहानी है।

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  12. दोस्तों नमस्कार

    आप भी सादर आमंत्रित हैं
    आज ये मेरी पहली पोस्ट है
    उम्मीद है पसंद आयेंगी आपको

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  13. kahani bahut sundar hai!...lomdi jaisi maansikata waalon ke saath aisaa hi vyavhaar karna chaahiye, jaisa ki saaras ne kiyaa!..dhanyawaad!

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  14. सदाबहार-सीख ! ऐसी छोटी और लाभ-प्रद कहानियां न आज पढ़ने को मिलती हैं न सुनने को !

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  15. यह ब्लॉग मुझे इसलिए अच्छा लगता है क्योंकि यह मुझे अपनी हिन्दी की पुरानी कहानियों से अवगत करवाता रहता है..
    आशा है कि कहानियों द्वारा यादों की माला यूँ ही बढ़ती जाएगी...

    आभार
    सुख-दुःख के साथी पर आपके विचारों का इंतज़ार है..

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  16. बचपन में ये कहानी सुनी थी , याद फिर से ताजा हो गई .

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  17. yahan aa kar mujhe itna achcha laga rha hai...bachpan me padhi hui sari kahaniyan wapas yaad aa gyi...ab bade maze se mai apni beti ko ye sari kahaniya sunaugi...

    bahut dhanywaad aapka.

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