Tuesday, January 10, 2012

माँ की नसीहत

                  किसी गांव मे एक सेठ रहता था| सेठ के परिवार मे पत्नी और दो बच्चे थे| बेटा बड़ा था और उसका नाम गोमू था| बेटी छोटी थी उस का नाम गोबिंदी था| गोबिंदी घर मे सब से छोटी थी इस लिए सब की  लाडली थी| हर कोई उसकी फरमाइश  पूरी करता था| धीरे धीरे बच्चे बड़े हो गए| बेटा शादी लायक हो गया| सेठ ने एक सुन्दर सी लड़की देख कर बेटे की शादी कर दी| घर मे नईं बहु आ गयी| बहु के आने पर घर वालों का बहु के प्रति आकर्षण बढ गया| गोबिंदी कि तरफ कुछ कम हो गया | गोबिंदी इस को बर्दाश्त नहीं कर सकी| वह अपनी भाभी से इर्ष्या करने लगी| जब गोबिंदी की माँ को इस बात का पता चला तो उसने गोबिंदी को बुलाकर अपने पास बैठाया और नसीहत देनी शुरु करदी| देखो बेटी  जिस तरह तुम इस घर की  बेटी हो वैसे ही वह भी किसी के घर की  बेटी है| नए घर मे आई है| उसे अपने घर के जैसा ही प्यार मिलना चाहिए| क्या तुम नहीं चाहती हो कि जैसा प्यार तुम्हे यहाँ मिल रहा है वैसा ही प्यार तुम्हारे ससुराल मे भी मिले?                             
                       अगर तुम किसी से प्यार, इज्जत पाना चाहती हो तो पहले खुद उसकी पहल करो| प्यार बाँटने से और बढता है| इस लिए तुम पहल  कर के अपनी भाभी से प्यार करो| वह इतनी बुरी नहीं है जितनी तुम इर्ष्या  करती हो| माँ की नसीहत को गोबिंदी ने पल्ले बांध लिया | अपनी भाभी को गले लगाकर प्यार दिया,और हंसी ख़ुशी साथ रहने लगे| जितना प्यार गोबिंदी ने अपनी भाभी को दिया उस से कहीं अधिक प्यार उसको मिला| इस लिए कभी किसी से इर्ष्या  नहीं करनी चाहिए|

12 comments:

  1. ईर्ष्या से संबंध नाममात्र के रह जाते हैं ... इसलिए इससे दूर रहना चाहिए

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  2. सुन्दर सीख , सुन्दर शब्दों में - आभार.

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  3. ईर्ष्या से दूर तो रहना ही चाहिए ....सुन्दर सीख देती हुई कहानी

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  4. बिलकुल सही बात ....मगर क्या करें इंसानी फितरत है बदलना कठिन होता है मगर नामुमकिन नहीं सार्थक प्रस्तुति...

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  5. बहुत ही खूबसूरत प्रस्तुति!

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  6. बहुत सुन्दर शिक्षाप्रद कहानी..काश सभी इस से सीख ले सकें.

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  7. बहुत बेहतरीन और प्रशंसनीय.......
    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

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  8. बहुत सुंदर सीख देती रचना, कहानी अच्छी लगी.....
    new post--काव्यान्जलि --हमदर्द-

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  9. नीतिपरक सर्व -कालिक कथा .प्यार बांटे चलो क्या हिन्दू क्या मुसलमान हम सब हैं भाई भाई ...प्यार और विद्या बाँटने से बढ़तीं हैं आवर्ती जमा सी .अच्छी कथा .बधाई .

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  10. इसीलिए कहते है प्यार करने और बांटने की चीज है !प्यार उसके बाद ही यार !बधाई

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