Wednesday, February 16, 2011

दुष्ट का क्षणिक संग भी कष्टकरी होता है

            किसी जंगल के रस्ते  में एक पीपल का विशाल पेड़ था| इस पीपल के पेड़ में अनेक पक्षियों ने अपने घोंसले बना रक्खे थे| उसी पेड़ पर एक हंस भी रहता था| हंस अपने उदार स्वभाव के कारन सभी पक्षियों के आदर का पत्र था| उसी पेड़ में एक कौआ भी रहता था| हंस के इस उदार भाव के कारन कौआ हंस से इर्ष्या करता था| 
           एक दिन कोई यात्री उस मार्ग से जा रहा था, उस के शारीर पर मूल्यवान वस्त्र और कंधे पर धनुष-बाण सोभा  दे रहे  थे| वह गर्मी की तपिश से ब्याकुल हो रहा था| पीपल के पेड़ की घनी छाया देख कर उसने उस पेड़ के निचे आराम करने का निश्चय किया| पेड़ की सुखद छाया में लेटते ही उसे नींद आगई| थोड़ी देर बाद सूर्य की रोशनी उस पथिक के ऊपर आगई| नींद गहरी होने के कारन वह सोता ही रहा| हंस ने जब सूर्य किरणों को उसके मुंह पर पड़ते देखा तो दयावश उसने अपने पंखों को फैला कर छाया कर दी, जिस से पथिक को सुख मिल सके| यात्री सुख पूर्वक सोता रहा| नींद में उसका मुंह खुल गया| उसी समय कौआ भी उडाता हुवा आया और हंस के पास बैठ गया| साधु स्वभाव वाले हंसने कौवे को अपने समीप आया देख उसे सादर बैठाया और कुशल-प्रश्न पूछा| कौवा तो स्वभाव से ही दुष्ट था, हंस को छाया किये देख कर वह मन ही मन सोचने लगा कि यदि में इस यात्री के ऊपर बीट कर के उड़ जाऊ तो यह यात्री जाग जाएगा तथा पंख फैलाए हंस को ही बीट करने वाला समझ कर मार डालेगा, इस से में इस हंस से मुक्ति पा जाऊंगा| जब तक यह हंस यहाँ रहेगा, तब तक सब इसी की प्रशंसा करते रहेंगे|
            यह विचार कर उस ईर्ष्यालु  कौएने सोए हुए पथिक के मुंह में बीट कर दी और उड़ गया| मुख में बीट गिरते ही यात्री चौंककर उठ बैठा| जब उसने ऊपर कि और देखा तो हंस को पंख फैलाए बैठा पाया| यद्यपि हंस ने उसका उपकार किया था, परन्तु दुष्ट के क्षणिक संग ने उसे ही दोषी बना दिया| यात्री ने सोचा कि इस हंस ने ही मेरे मुंह में बीट की है, यात्री को गुस्सा तो थाही उसने धनुष-बाण उठाया और एक ही तीर से हंस का काम तमाम कर दिया| बेचारा हंस उस दुष्ट कौए  के क्षणिक संग के कारन मृत्यु को प्राप्त हुआ|
            इस लिए कहा गया है कि दुष्ट के साथ न तो कभी बैठना चाहिए और नाही कभी दुष्ट का साथ देना चाहिए|

13 comments:

  1. संदेशपरक कहानी.
    सलाम

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  2. bahut achhi gyanvardhak kahani, per kya kshanik chintan upyogi nahi janne ke liye

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  3. aap apni kahaniyaan is blog ke saath saath hamen bhi preshit karen vatvriksh ke liye, to khushi hogi ... rasprabha@gmail.com per

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  4. अच्छी बात बताती कहानी .....

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  5. Is kahani ko to main kavya roop de chuki hoon bahut pahle .kai barsh ho gaye .ye mujhe sada hi pasand rahi .

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  6. बहुत अच्छी शिक्षाप्रद कहानी..

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  7. bahut sundar kahaani... aapki yah post bachho aur badon kee jaankari ke liye kal charchamanch par dalungi.. aapkaa aabhaar jo hame itni sundar kahaniya padhatey hain..

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  8. अच्छी शिक्षा प्रद कहानी है कृपया आप हमें भी ऐसी कहानिया भेजा करो यही निवेदन है।

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